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यह विचारधारा राष्ट्र की एकता, संप्रभुता और विकास को व्यक्तिगत या सामूहिक हितों से ऊपर रखती है। राष्ट्र सर्वोपरी भावना का तात्पर्य है कि देश की सुरक्षा, प्रगति और समृद्धि को सर्वोपरि मानते हुए हर नागरिक तथा संस्था को उसी के अनुरूप कार्य करना चाहिए। इसमें जाति, धर्म, भाषा जैसे विभाजनकारी तत्वों से ऊपर उठकर समग्र राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखना शामिल है।

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बुधवार, 19 नवंबर 2025

हिन्दू राष्ट्र की और अग्रसर भारत

 पहले संघ प्रमुख का बयान आया एक नया दर्शन सामने रखा कि भारत अब अंतर्राष्ट्रीयवाद की ओर बढे, अभिप्राय था कि भारत ही अब विश्व को राह दिखायेगा। इसके कुछ ही घंटे मे प्रधानमंत्री कहते है कि मैकाले की शिक्षा नीति को खत्म करने का समय आ गया है।


ये आप उभरते हिन्दुराष्ट्र के गवाह बन रहे है, ऐसा तब होता है जब व्यवस्था आत्मविश्वास से परिपूर्ण होती है। महाराष्ट्र और बिहार चुनाव जीतने के बाद इतना विश्वास आ गया कि 20-25 साल अभी विपक्ष नहीं है, आगामी चुनाव सिर्फ यह तय करेंगे कि बीजेपी बहुमत से सरकार बनाएगी या गठबंधन से।


कहने को जिया उल हक ने भी पाकिस्तान का इस्लामीकरण किया था मगर वो बहुत भद्दा था, जिया ने कट्टरपंथी मौलानाओ का साथ लिया और जो कानूनों को थोपना शुरू किया। लेकिन भारत मे ऐसा नहीं होगा, यहाँ पहले समय लिया गया उन सभी हिन्दू विरोधी ऑब्जेक्ट्स को खत्म किया गया जो आगे बाधा बन सकते थे।


मुख्य दल कांग्रेस समाप्त हुआ, उस पर अब आधिकारिक रूप से मुस्लिम लीग का टैग लग चुका है। अरविन्द केजरीवाल की वजह से नए चेहरे पर किसी को भरोसा नहीं है, प्रशांत किशोर इसका पुख्ता सबूत है। अब जो है सिर्फ बीजेपी है, NDTV के बाद एक मात्र वामपंथी किला भी ढह गया।


न्यायपालिका की भी चिंता मत कीजिये अभी 1985 के बैच वाले जज बन रहे है, जैसे जैसे ये 1990 के राम मंदिर आंदोलन समय के जज आएंगे वैसे वैसे न्यायपालिका की भी चिंता दूर हो जायेगी।


सबसे बड़ा सुधार तो अंतर्राष्ट्रीय है, हम अमेरिका के टेरीफ झेल गए। अमेरिका को निर्यात 11% कम हुए मगर कुल निर्यात मे 6% की वृद्धि हो गयी। एकदम स्पष्ट सन्देश है कि हम झेल गए, वो जो हसीन सपने थे कि नौकरिया कट होंगी, भारत जलेगा ब्ला ब्ला सब धरे रह गए।


राहुल गाँधी गृहयुद्ध के प्रयासों मे आज से नहीं लगा बल्कि 2016 से प्रयासरत है। लेकिन इतना स्पष्ट है कि भारत की संरचना गृहयुद्ध वाली नहीं है। अब तो ट्रम्प भी जवाब देने लगे है, वापस इंडिया इज माय फ्रेंड वाले मोड मे आ गए है। भारत अमेरिका ट्रेड डील बहुत करीब है ये टेरीफ घटकर 12-15 प्रतिशत हो जायेंगे।


भारत ने जापान या इटली की तरह कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई, ट्रेड डील अपनी शर्तों पर अपनी रफ्तार से होंगी और दूरगामी परिणामो को ध्यान मे रखकर होंगी। चीन तक जहाँ झुक गया वहाँ भारत नहीं झुका, चीन ने दुर्लभ मृदा धातु अमेरिका को देना स्वीकार कर लिया बदले मे अमेरिका ने टेरीफ 57 से 47 प्रतिशत कर दिये।


ये जो विश्वास है वो ऐसे ही नहीं आता, उसके पीछे कुछ तत्व होते है। लॉर्ड मैकाले ने स्पष्ट रूप से कहा था कि भारत को यदि गुलाम बनाये रखना है तो उसकी शिक्षा नीति बदल दो। बदल भी गयी, देखा जाए तो हम नया नहीं कर रहे है जो पुराना था उसी को आधुनिकता मे बदल रहे है।


ये ऐतिहासिक क्षण है, जैसे भारत के इतिहास मे तराइन और पानीपत का युद्ध शामिल है, यूरोप मे फ्रेंच और रुसी क्रांति शामिल है ठीक वैसे ही ये भी एक क्रांति है। आगामी पीढ़ी ये नहीं कहेगी कि भारत सांप बिच्छू का देश है या वास्कोडिगामा ने भारत खोजा, वह पीढ़ी गर्व से कहेगी कि हिमालय से समुद्रपर्यन्त भूमि का कण कण सनातन है और प्राचीन से भी प्राचीन है।


40 साल बाद के वकील इस्लामिक आतंकवाद को न्यायोचित नहीं ठहरा पाएंगे, सेक्युलर तब भी होंगे मगर वे सच मे सेक्युलर होंगे आज वालो जैसे प्रो इस्लामिक सेक्युलर नहीं होंगे। कई लोग कह सकते है कि मुसलमानो की आबादी बढ़ रही है, ये हो रहा है वो रहा है, उन्हें जानकारी के लिए बता दू कि इस्लाम भी अपने इतिहास मे पहली बार किसी सभ्यता से टकरा रहा है।


रामायण मे वर्णन है, राम ज़ब यज्ञ की रक्षा के लिए असुर मारते है तो उनकी संख्या बढ़ जाती थी लेकिन फिर भी असुरो का संहार तो हुआ। इस्लाम ने अब तक जिन सभ्यताओं को तबाह किया है वे कबिलो और जंगलो मे रहने वाली थी, भारत मे वो जिससे भीड़ रहा है यह वो सभ्यता है जो सदियों से सनातन है, इतिहास से भी प्राचीन है।


हिरण्यकश्यप, रावण और कंस जैसे कितने ही विशाल आकर मिट्टी मे मिल गए मगर ये नहीं हिली, एक तरफ ऋषि मुनियो का तप और ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त भारतभूमि है दूसरी तरफ 1500 वर्षो से प्रकृति को घाव देता एक रेगिस्तानी तूफान है। ये युद्ध भी हम सभ्यता ही जीतेगी।


कुछ लोगो को लग सकता है कि हिन्दुराष्ट्र बनाना तो अन्य धर्मों के साथ अन्याय है, लेकिन इसका उत्तरदायित्व उन स्वघोषित सेक्युलरों पर है जिन्होंने खुद को महान दिखाने के लिए सेक्युलरीज्म मे हिन्दू विरोध घुसाया, हिन्दू 60 साल से सेक्युलर ही था यदि वो दोबारा हिन्दू बना तो उसका श्रेय इन्हे ही जाएगा।


2047 सिर्फ विकसित भारत का संकल्प नहीं है बल्कि ये उससे आगे बहुत कुछ है। मोहन भागवत ने जो अंतर्राष्ट्रीयवाद की बात कही वह एक बहुत बड़ा मैसेज है, मोदीजी का मैकाले पर बयान इसके क्रम मे कही बात है।

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